Dehradun:
शासन/प्रशासन को गुमराह कर निजी हित में हाईकोर्ट को भेजी भ्रामक आख्या ;कार्य करते हुए लोकहित के निर्णय का किया विरोध;
06 मदिरा दुकानों के शिफ्टिंग का था मामला; डीएम के फैसले को आबकारी आयुक्त, शासन, मा0 न्यायालय ने रखा था बरकरार
जिलाधिकारी सविन बसंल की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा समिति द्वारा यातायात एवं जनसुरक्षा के दृष्टिगत बाधक बनी 06 शराब की दुकानों के शिफ्टिंग के आदेश जारी किये थे। सम्बन्धित अनुज्ञापियों ने फैसले के विरूद्ध मा0 उच्च न्यायालय, आबकारी आयुक्त एवं शासन में अपील की थी जिसको सभी स्तरों पर खारिज कर दिया गया था।
जिलाधिकारी देहरादून द्वारा जनहित में 6 शराब की दुकानों को वर्तमान स्थल से अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर स्थानान्तरित करने के लिए जो निर्णय को मा न्यायालय ने लोकहित में उचित माना। इस सम्बन्ध में अनुज्ञापियों द्वारा मा० उच्च न्यायालय में योजित समस्त रिट याचिकाओं में उच्च न्यायालय द्वारा जिलाधिकारी / Licencing authority द्वारा निर्गत आदेश आबकारी आयुक्त द्वारा निस्तारित अपील, शासन स्तर पर दायर हुई निगरानी पर हुए निर्णयः इनमें से किसी पर किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं की ।
जनपद में कानून व्यवस्था से लेकर लोकहित एवं जन सुरक्षा एवं जन भावना के अनुकूल निर्णय लेना जिलाधिकारी का दायित्व है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (SCCoRS), New Delhi द्वारा निर्गत निर्देश 29-03-2022 के बिन्दु 5.1 द्वारा गठित जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति को जनपद में सड़क सुरक्षा सम्बन्धी जन दुर्घटनाओं के कारक, प्रतिरोध व त्रासदियों के मूल कारणों का आंकलन करते हुए निराकरण हेतु पूर्णरूप से अधिकृत किया गया है।
आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी के०पी० सिंह द्वारा मा० न्यायालय, में पक्ष रखने के लिए जो नैरेटिव/तथ्य प्रेषित किये गये हैं वह अन्य किसी सक्षम अधिकारी यथा जिलाधिकारी, आबकारी आयुक्त, प्रमुख सचिव, आबकारी, उत्तराखण्ड शासन के अनुशंसा/अनुमोदन के बिना ही प्रेषित किये गये।
उनके उपर जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति एवं जिलाधिकारी, आबकारी आयुक्त, प्रमुख सचिव, आबकारी, उत्तराखण्ड शासन के निर्णयों के विपरीत कृत्य करने तथा उच्चाधिकारियों को गुमराह करते हुए सभी प्राधिकारियों से तथ्य छुपाते हुए, उच्च आदेशों की अवहेलना व कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत कार्य का आरोप है।
