नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने University Grants Commission (यूजीसी) की सिफारिश पर National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) को “डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी” का दर्जा दे दिया है। इस फैसले के बाद अब एनसीईआरटी को विश्वविद्यालय की तरह शैक्षणिक और शोध गतिविधियां संचालित करने की स्वायत्तता मिलेगी, हालांकि इसके साथ कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लागू की गई हैं।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिला दर्जा
एनसीईआरटी ने वर्ष 2025 में सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने जांच कर इसे सही पाया। जनवरी 2026 में हुई यूजीसी की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिली, जिसके बाद केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसे लागू कर दिया।
छह प्रमुख संस्थान शामिल
इस विशेष दर्जे के तहत एनसीईआरटी के छह प्रमुख क्षेत्रीय संस्थानों को शामिल किया गया है। ये संस्थान Ajmer, Bhopal, Bhubaneswar, Mysuru, Shillong और भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान हैं। इन सभी को मिलाकर एनसीईआरटी को एक विशिष्ट श्रेणी में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।
सख्त शर्तों के साथ मिली स्वायत्तता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एनसीईआरटी अपनी संपत्ति या फंड बिना अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकेगा और न ही किसी लाभ कमाने वाली गतिविधि में शामिल होगा। सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक फैसले यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही होंगे।
कोर्स और एडमिशन पर नियम लागू
एनसीईआरटी को नए कोर्स, ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस शुरू करने के लिए तय नियमों का पालन करना होगा। साथ ही, एडमिशन प्रक्रिया, सीटों की संख्या और फीस संरचना भी नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी।
रिसर्च और गुणवत्ता पर फोकस
नई व्यवस्था के तहत एनसीईआरटी को शोध कार्य, पीएचडी कार्यक्रम और शैक्षणिक नवाचार को बढ़ावा देना होगा। इसके साथ ही NAAC और NBA से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। संस्थान को हर साल National Institutional Ranking Framework (NIRF) रैंकिंग में भी भाग लेना होगा, ताकि उसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सके।
