टीएचडीसी टनल हादसा : मृतकों के परिजनों को एक करोड़, घायलों को 50 लाख की सहायता की मांग

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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के मायापुर-पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में हुए हादसे के बाद प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों की आर्थिक सहायता एवं पुनर्वास का मुद्दा लगातार उठ रहा है। इसी कड़ी में दशोली ब्लाॅक के ज्येष्ठ प्रमुख बिपिन सिंह कंडारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हादसे में प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग की।

कंडारी ने मुख्यमंत्री के समक्ष हादसे में मृत श्रमिकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये तथा घायल श्रमिकों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि टनल हादसे ने कई परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को तत्काल और सम्मानजनक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना सरकार और परियोजना प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हादसे में जिन परिवारों ने अपने कमाऊ सदस्य खोए हैं, उनके सामने भविष्य की आजीविका, बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। केवल तत्काल राहत देने से इन परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सरकार को मृतकों के आश्रितों के पुनर्वास और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए विशेष पैकेज पर विचार करना चाहिए।

कंडारी ने घायलों के लिए भी पर्याप्त आर्थिक सहायता की मांग की। उन्होंने कहा कि हादसे में घायल हुए श्रमिकों को लंबे समय तक उपचार और देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है। गंभीर रूप से घायल श्रमिकों के उपचार, पुनर्वास और भविष्य की कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए, ताकि हादसे के बाद उनका परिवार आर्थिक संकट में न फंसे।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों के साथ सरकार मजबूती से खड़ी हो और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं है, बल्कि उन परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा मामला है, जिन्होंने परियोजना निर्माण के दौरान अपने परिजनों को खोया या उनके परिजन गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

कंडारी ने कहा कि सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के साथ-साथ मृत श्रमिकों के आश्रितों के लिए रोजगार अथवा आजीविका की व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। बच्चों की शिक्षा, परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और घायलों के बेहतर उपचार के लिए अलग से प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के निर्माण में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी सरकार और परियोजना प्रबंधन को मानवीय दृष्टिकोण से उठानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि हादसे से प्रभावित प्रत्येक परिवार की स्थिति का अलग-अलग आकलन कर आवश्यकता के अनुरूप सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ज्येष्ठ प्रमुख बिपिन सिंह कंडारी ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस गंभीर विषय पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में प्रभावित परिवारों को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाना चाहिए और सरकार को उनके साथ मजबूती से खड़ा होकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।

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