त्यूणी के छात्रों की सबसे बड़ी उम्मीद—क्या जिलाधिकारी लिखेंगे नया इतिहास…

चार साल की प्रतीक्षा, एक नई उम्मीद—त्यूणी के छात्रों को अब जिलाधिकारी से भरोसा

by news7point

जौनसार-बाबर की सबसे दूरस्थ तहसील त्यूणी, जो आज तक एक समुचित पुस्तकालय और कोचिंग संस्थान से वंचित रही है, अब शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ की प्रतीक्षा कर रही है। वर्षों से उपेक्षित यह क्षेत्र पहली बार वास्तविक परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है—और यह उम्मीद सीधे तौर पर जिलाधिकारी देहरादून श्री सविन बंसल की सक्रियता और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टि से जुड़ी है।

चार वर्ष पूर्व जनजाति कल्याण उत्थान फाउंडेशन के प्रयासों से जिस पुस्तकालय की नींव रखी गई थी, वह स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत ₹5,00,000 की लागत से निर्मित हुआ था। परंतु संचालन की कमी और प्रबंधन के अभाव के कारण वह इमारत आज खंडहर जैसी स्थिति में पहुँच गई—जिसने न केवल छात्रों को निराश किया, बल्कि शिक्षा से जुड़े सपनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

किन्तु इस सप्ताह संगठन के प्रतिनिधियों की जिलाधिकारी से हुई भेंट के बाद इस परियोजना में नई ऊर्जा और दिशा दिखाई देने लगी है। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा व्यक्त किया गया गंभीर आश्वासन, ठोस रुचि और तत्काल हस्तक्षेप का संकेत—इन सभी ने क्षेत्र के युवाओं, अभिभावकों और समाज के बीच अभूतपूर्व उम्मीद निर्मित कर दी है।

स्थानीय जनमत का कहना है कि—
“त्यूणी को आज जितनी उम्मीद है, वह किसी सामान्य अधिकारी से नहीं, बल्कि ऐसे प्रशासक से है जिनके निर्णय स्पष्ट होते हैं और जिनकी कलम जहाँ चलती है वहाँ परिवर्तन दिखाई देता है। वह नाम है—सविन बंसल।”

जिलाधिकारी की प्रशासनिक शैली पहले भी कई संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्टता और परिणाम देने के लिए जानी जाती रही है। इसी कारण स्थानीय समुदाय को विश्वास है कि यह पुस्तकालय परियोजना अब केवल एक ‘योजना’ नहीं रहेगी, बल्कि अपनी पूर्णता की ओर बढ़ती एक वास्तविकता बनेगी।

जनजाति कल्याण उत्थान फाउंडेशन के सदस्य भी मानते हैं कि चार साल पहले जो मिशन उन्होंने शुरू किया था, वह अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। उनका कहना है कि—
“जिलाधिकारी की गंभीरता ने पहली बार यह एहसास कराया है कि त्यूणी में शिक्षा के लिए वह परिवर्तन संभव है, जिसकी उम्मीद कभी नहीं थी।”

त्यूणी के सैकड़ों छात्र—चाहे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, स्नातक पढ़ रहे हों या परामर्श-सुविधाओं की खोज में हों—अब यह मानकर चल रहे हैं कि उन्हें शीघ्र ही एक शांत, सुव्यवस्थित और संसाधनों से युक्त पुस्तकालय उपलब्ध होगा।

यह परियोजना सिर्फ एक भवन पुनर्स्थापना नहीं, बल्कि पूरे जनजातीय क्षेत्र के शैक्षिक भविष्य का पुनर्जागरण प्रतीत हो रही है। और यदि जिलाधिकारी का हस्तक्षेप इसी गंभीरता से आगे बढ़ा, तो त्यूणी जल्द ही उस परिवर्तन का साक्षी बनेगा जिसकी प्रतीक्षा वर्षों से थी।

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