मंत्री जी का प्लान” और वायरल वीडियो
इसी बीच मसूरी में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक मंत्री जी पहले से ही तय मूड में थे – आज डीएम साहब को डटकर सुनाना है, ताकि जनता को लगे कि मैं सख्त हूं।”
लेकिन हुआ इसका उल्टा।
जैसे ही मंत्री जी ने डीएम साहब को फोन न उठाने पर खड़े-खड़े डांट दिया, किसी ने यह वीडियो बना लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर डालते ही लोग भड़क गए। लोग लिखने लगे – “रातभर जो अफसर गांव-गांव पैदल जाकर राहत कार्य देख रहा था, उसे डांटना कहां की समझदारी है? 2 “मंत्री जी, आप क्यों नहीं रात को आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचे?”परिणाम यह हुआ कि जो प्लान मंत्री जी को जनता का हीरो बनाने वाला था, वही डीएम बंसल के लिए ताली और मंत्री जी के लिए आलोचना बन गया।

देहरादून गोविंद शर्मा
– कभी-कभी कोई घटना पूरे प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दुनिया को हिला देती है। बीते दिनों देहरादून जिले में ठीक ऐसा ही हुआ। एक तरफ थे जिलाधिकारी सविन बंसल, जो दिन-रात एक कर आपदा पीड़ितों के बीच डटे थे, दूसरी तरफ थे कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, जिन्होंने फोन न उठाने पर डीएम साहब को खरी-खोटी सुना दी। यह टकराव सोशल मीडिया पर ऐसे वायरल हुआ कि अब पूरा प्रदेश चर्चा कर रहा है – “क्या यह सही हुआ?”
आपदा की रात को याद कीजिए – जब लोग अपने घरों में डरे-सहमे बैठे थे, सड़कें टूटी हुई थीं, नाले उफान पर थे, पहाड़ों से मलबा गिर रहा था। ऐसे में डीएम सविन बंसल अपनी टीम के साथ खुद ग्राउंड जीरो पर मौजूद थे। रात के 2 बजे, 3 बजे भी वह मौके पर थे। पीड़ित परिवारों को खाना, दवाई, राहत सामग्री, सब कुछ तुरंत उपलब्ध कराया गया। कई जगह तो उन्होंने मौके पर ही धनराशि स्वीकृत करवाई ताकि पीड़ितों का तुरंत मुआवजा बन सके।
लेकिन सुबह होते-होते मसूरी में कैबिनेट मंत्री जी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से डीएम साहब को सुना दिया कि – “फोन क्यों नहीं उठाया?” बस फिर क्या था, यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया।
लोगों ने कहना शुरू कर दिया –
अरे मंत्री जी, रातभर जो अधिकारी पैदल-पैदल गांवों में जाकर राहत कार्य देख रहा था, उसे डांटने के बजाय धन्यवाद देना चाहिए था। अगर आपको इतनी चिंता थी तो आप खुद रात में मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?”
फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर #SavinBansal और #RealHero ट्रेंड करने लगा। लोग डीएम बंसल को देहरादून का असली हीरो बताने लगे।

बंसल का स्टाइल – ऑन द स्पॉट एक्शन
डीएम बंसल की सबसे बड़ी खासियत है कि वह फाइलों में नहीं उलझते, मौके पर पहुंचकर तुरंत फैसला लेते हैं। यही वजह है कि इस बार आपदा में देहरादून के लोग राहत महसूस कर रहे हैं।
कई गांवों में वह खुद पैदल पहुंचे, लोगों की समस्याएं सुनीं, मौके पर ही JCB लगवाकर सड़क खुलवाई, जहां जरूरत थी वहां तुरंत हेल्पलाइन से राहत सामग्री बुलवाई। यह कोई आम बात नहीं है।
मंत्री बनाम डीएम – जनता का फैसला साफ
राजनीति में यह पहली बार नहीं हुआ कि किसी मंत्री और अधिकारी के बीच तनाव हुआ हो, लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ गया। जनता मंत्री के बजाय डीएम के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।
लोग लिख रहे हैं –
सरकारी अफसर होते हुए भी इतनी ईमानदारी और मेहनत से काम करने वाले अधिकारी बहुत कम हैं। बंसल साहब देहरादून की सबसे बड़ी ताकत बन गए हैं।”

गणेश जोशी जी, आपको तो गर्व होना चाहिए था कि आपके जिले में इतना सक्रिय डीएम है, जो खुद ग्राउंड जीरो पर उतर कर काम कर रहा है।”
सोशल मीडिया पर वायरल सपोर्ट
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, पूरे प्रदेश से सपोर्ट की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने लिखा कि –
“हमें फोन उठाने वाले नहीं, मौके पर पहुंचने वाले अधिकारी चाहिए।”
“जो रात को भी जनता के बीच जाकर काम करे, वही सच्चा जनसेवक है। बंसल साहब को सलाम।”
क्या यह घटना बड़ा संदेश दे गई?
इस घटना ने एक बड़ा संदेश दिया है – जनता अब सिर्फ बातें करने वाले नेताओं को नहीं, बल्कि ग्राउंड पर काम करने वाले अफसरों को अपना असली हीरो मानने लगी है।
डीएम सविन बंसल का यह अंदाज शायद कई नेताओं को रास नहीं आ रहा, लेकिन जनता का एक ही कहना है –
हमें ऐसे ही अधिकारी चाहिए जो हमारी तकलीफ समझें और बिना समय गंवाए मदद करें।”
बंसल साहब का यह दौर याद रखा जाएगा। यह घटना साबित करती है कि जिला प्रशासन का असली चेहरा वही है जो जनता के बीच रहकर काम करे। चाहे राजनीति में कितनी भी बयानबाज़ी हो, जनता अब सब समझती है।
और हां, यह भी सच है कि –
“बंसल होना कोई आम बात नहीं है।”
